भाभी ने देवर संग लिए शादी के सात फेरे, मंजर देख कर नहीं रोक पाए लोग अपने आंसू

हमारे भारत देश में तरह तरह के लोग रह रहे हैं और उनकी तरह तरह की सोच भी है यहां कुछ लोग कुरीतियों को मानकर शुभ अशुभ में विश्वास रखते हैं तो कुछ लोग पुनर्विवाह को भी आप समझते हैं. हालांकि बहुत से पढ़े लिखे लोग अपनी अच्छी सोच के चलते भी देश का नाम गर्व से ऊंचा कर रहे हैं.

कुछ ऐसा ही मामला हाल ही में बुंदेलखंड से सामने आया है जहां पर एक देवर ने अपनी भाभी को पत्नी मान लिया है और समाज के सामने वरमाला गले में डालकर सात फेरे भी ले लिए हैं. दरअसल इस देवर की भाभी विधवा थी ऐसे में इन दोनों की शादी अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा बांदा शाखा ने विधवा विवाह मैरिज हॉल में पूरी शानो शौकत से करवाई.

आपको यह जानकर हैरत होगी कि बुंदेलखंड में किसी भी औरत का दूसरा विवाह शुभ नहीं माना जाता है लेकिन क्षत्रिय महासभा ने इस मान्यता को ठुकरा दिया है और समाज में इस महिला को नया स्थान दिलवा दिया है.

गौरतलब है कि जब विधवा बंदना सिंह ने अपने देवर के साथ शादी के साथ फेरे लिए तो इस शादी को देख कर सब का दिल भर आया और लोगों ने नम आंखों के साथ तालियां बजा दी. देवर शुभम सिंह उउर्फ़ मनीष के साथ शादी करके वंदना ने समाज में जीने की एक नई शुरुआत की है. वही इस विवाह उत्सव में दोनों पक्ष के परिवार वाले वह व्यवहारी मौजूद थे.

बता दें कि दोबारा सुहागन बनी वंदना सिंह स्नातक है और देवर के साथ शादी करने से पहले उन्होंने बताया कि जब उनकी देवर के भाई से शादी हुई थी तो कुछ ही महीने बाद पति का निधन भी हो गया था जिसके बाद से वह बुरी तरह से टूट चुकी थी. अन्ना ने बताया कि तब उसके सास ससुर और ससुराल के सारे लोग उनके लिए संकटमोचक साबित हुए और अपने देवर के साथ उन्होंने सात फेरे लेने के लिए हामी भर दी.

वंदना ने बताया कि जब से उसकी शादी हुई थी उसके बाद से ससुराल वाले उसे अपने मायके से भी ज्यादा पसंद थे और वह मायके से ज्यादा ससुराल में ही रहना पसंद करती थी. वंदना ने नई मिसाल पैदा करते हुए विधवाओं को सलाह दी कि ऐसे समय पर हौसला रखना चाहिए और परिवार वालों की मदद से जीवन की नई शुरुआत करनी चाहिए.

वही महिला के पति शुभम सिंह ने बताया कि ससुराल में सभी के साथ वंदना का स्वभाव काफी सम्मान पूर्वक था ऐसे में उसने जल्द ही सबका दिल जीत लिया था जब उसके बड़े भाई का निधन हुआ था तो उसकी भाभी पूरी तरह से टूट चुकी थी ऐसे में मैं यह समझता था कि एक महिला के लिए अकेला जीवन काटना कितना मुश्किल है.

इसी सोच के चलते उसने यह ठान ली थी कि वह भाभी से शादी करेगा वही शादी के दौरान क्षत्रिय महासभा के बांदा जिला अध्यक्ष नरेंद्र सिंह परिहार समेत अन्य सभी लोगों ने वर-वधू को नए जीवन के लिए शुभकामनाएं व आशीर्वाद दिया. इसके साथ ही कहा गया कि जो कम उम्र में विधवा हो जाती हैं उन बेटियों की उपेक्षा और दशा के अनुसार उनकी दोबारा शादी करवाने में कोई दिक्कत नहीं है.


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