किन्नरों की भी होती है शादी, एक रात की बनती है दुल्हन, फिर हो जाती हैं विधवा

भारत देश विविधताओं से भरा हुआ देश है और इस देश में कई प्रकार की प्रथाएं, संस्कृति और रिवाज चलती आ रही है. इनमें से कई रिवाजों को हम अपनी आंखों से देखते भी हैं और इनमें से कई का पालन भी करते हैं.

आज हम आपको समाज के उस तबके के एक रीवाज से अवगत कराने वाले हैं, जिसको आप देखते तो हैं, पर उसके बारे में बात करने से पहले 1 मिनट जरा सोच लेते हैं. जी हां वह समाज है किन्नर समाज.

आपको जानकर हैरानी होगी की अच्छी खासी संख्या में इस देश में निवास करने वाले किन्नर समाज का अपना समूह है, अपनी दुनिया है. आपको वो सिग्नल रेलगाड़ियों और बड़े शहरों के चौराहों पर लोगों को बधाई देती दिख जाएंगी. अर्धनारी कहीं जाने वाली यह जाति आज भी समाज में उपेक्षा की शिकार है.

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि नहीं किन्नरों की भी शादी होती है. लेकिन वह शादी सिर्फ और सिर्फ 1 दिन के लिए होती है यानी आज शादी हुई और कल सब खत्म. किन्नरों का अगर कभी विवाह देखना तो आपको तमिलनाडु जरूर जाना चाहिए.

तमिलनाडु में हर वर्ष नव वर्ष की पहली पूर्णमासी को किन्नरों का विवाह उत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. यह उत्सव 18 दिनों तक चलता है.

इसमें भगवान इरावन की पूजा होती है. 18 दिन तक चलने वाले इस महोत्सव में 17वें दिन किन्नर भगवान इरावन से ब्याह रचाते हैं. श्रृंगार करते हैं और उसके अगले दिन भगवान की मूर्ति को तोड़ दिया जाता है. वह खुद को विधवा कर लेते हैं. विवाह के अगले दिन शोक पूर्ण माहौल रहता है. अपने श्रृंगार उतार कर एक विधवा की भांति किन्नर खूब विलाप करते हैं और अपने एक रात के पति को याद करते हैं.

किन्नरों के विवाह का यह रिवाज महाभारत काल से जुड़ा हुआ है. आपको बता दें कि महाभारत की युद्ध में हिस्सा लेने से पहले पांडवों ने मां काली की पूजा अर्चना की थी. इस पूजा अर्चना के दौरान माता काली को बलि देने की एक प्रथा थी, इसमें किसी एक राजकुमार की बलि देना आवश्यक होता था. जब कोई भी राजकुमार अपनी बलि देने के लिए तैयार नहीं हुआ, तब लोगों में चिंता बढ़ गई.

तब जाकर इरावन नाम का एक राजकुमार मां काली के लिए अपनी जान समर्पित करने के लिए आगे आया. लेकिन उसने एक शर्त रखी. उसने कहा कि वह अविवाहित नहीं मारना चाहता, जिसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि एक ऐसा राजकुमार जो महज एक रात के बाद स्वर्गवासी हो जाएगा, उससे विवाह करेगा कौन?

तब आखिरकार भगवान कृष्ण ने फिर से एक मायाजाल रचा और स्वयं को मोहिनी रूप में इरावन के सामने प्रस्तुत कर दिया. अगले दिन सुबह इरावण की बलि दे दी गई. तभी से यह प्रथा चल पड़ी और किन्नर एक दिन का विवाह कर खुद को सुहागन बनाते हैं और फिर अगले दिन खुद को विधवा करके विलाप करते हैं.


Posted

in

by

Tags: