महेश बाबू को शाहरुख खान से सीखना चाहिए, सवालों के जवाब कैसे देते हैं

साउथ स्टार महेश बाबू. बीते कुछ दिनों से चर्चा में हैं. वजह है उनका एक बयान. दरअसल अदिवि शेष की फिल्म ‘मेजर’ के ट्रेलर लॉन्च के मौके पर महेश ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को लेकर एक स्टेटमेंट दिया था. महेश ने कहा था, ”हिंदी फिल्म इंडस्ट्री मुझे अफोर्ड नहीं कर सकती”.

अब इंटरनेट पर शाहरुख खान का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में शाहरुख से महेश बाबू जैसा मिलता-जुलता सवाल पूछा गया है. और शाहरुख ने बिना किसी को ऑफेंड किए बेहतरीन जवाब दिया है. इंटरनेट पर इस वक्त इस वीडियो को हाथो-हाथ लिया जा रहा है. क्या है पूरा माजरा, आइये जानते हैं.

पूरा मामला ‘मेजर’ के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में शुरू हुआ. फिल्म के प्रोड्यूसर महेश बाबू भी लॉन्च इवेंट पर पहुंचे. उनसे पूछा गया,

”आपमें ये फोकस कैसे है कि अपनी फ़िल्में सिर्फ तेलुगु में ही लेकर आनी हैं, पैन इंडिया रिलीज़ का कोई लालच नहीं है.”

इस पर महेश ने कहा,

”मुझे हिंदी फिल्मों से कई ऑफर्स मिलते हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता है कि वो लोग मुझे अफोर्ड कर सकते हैं. मैं ऐसी इंडस्ट्री में काम नहीं कर सकता जो मुझे अफोर्ड नहीं कर सकती.”

महेश बाबू ने कहा जो इज्ज़त और स्टारडम उन्हें साउथ इंडस्ट्री में मिला है, वो उनके लिए बहुत बड़ी चीज़ है. वो बॉलीवुड में अपना टाइम वेस्ट नहीं करना चाहते. इसलिए वो साउथ इंडस्ट्री छोड़कर किसी दूसरी इंडस्ट्री का हिस्सा नहीं बनना चाहते.

वैसे तो महेश बाबू की ये बात समझ से बाहर है. क्योंकि जिस हिंदी इंडस्ट्री ने रजनीकांत, कमल हासन, अमिताभ बच्चन, दिलीप कुमार, शाहरुख, सलमान, आमिर को अफोर्ड किया, वो महेश जैसे स्टार को किस लिहाज से अफोर्ड नहीं कर पाएगी. लेकिन कुछ ऐसा ही सवाल शाहरुख खान से भी पूछा गया था.

साल 2008 में शाहरुख खान बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में पहुंचे थे. यहां एक प्रेस कॉन्फेंस में उनसे सवाल किया गया,

आप बॉलीवुड के ग्रेटेस्ट स्टार हैं मगर क्या आपने कभी हॉलीवुड के बारे में सोचा है? क्या आप हॉलीवुड की ड्रीम फैक्ट्री में काम करना चाहते हैं?

इस सवाल पर शाहरुख ने थोड़ा फनी वे में जवाब दिया. कहा,

”मेरी इंग्लिश अच्छी नहीं है. हो सकता है वहां मुझे ऐसा रोल मिले, जहाँ बोलने का मौका न मिले. मैं मॉडेस्टी नहीं दिखा रहा हूँ. मगर मुझे लगता है कि मैं 42 साल का हो गया हूं. मेरा रंग थोड़ा ब्राउनिश सा है. बतौर एक्टर मेरे अंदर कोई यूएसपी नहीं है, मुझमें स्पेशैलिटी नहीं है. जैसे मुझे कुंग फू नहीं आता, मैं लैटिन सालसा पर डांस नहीं कर सकता, मैं ज़्यादा लंबा भी नहीं हूं. आप जिसे ड्रीम फैक्ट्री कह रहे हैं मुझे ऐसा लगता है कि वहां मेरे लिए कोई स्पेस नहीं है. तो, मुझे ऐसा लगता है कि मैं उतना टैलेंटेड नहीं हूं. इसलिए मैं इंडियन फिल्मों में ही काम करना चाहता हूं और चाहता हूं कि उन फिल्मों को इंटरनेशनल लेवल पर पहचान दिलवाऊं.”

शाहरुख़ ने आगे कहा था,

मैं लंबे समय से काम कर रहा हूं और चाहता हूं कि लोग इंडियन फिल्म्स देखें. मैं जिस जगह हूं वहां के सिनेमा के लिए मैं ज़रूरी हूं. मैं अपने ज़रिए लोगों को, फिर चाहे वो जर्मनी के हों, अमेरिका के हों या उन जगहों से हों जहां हिन्दी फिल्में ज़्यादा पॉपुलर नहीं हैं, उन लोगों को मैं हिंदी फिल्में दिखाना चाहता हूं.

शाहरुख खान ने इतने प्यार से हॉलीवुड में काम करने से मना कर दिया. जवाब सुनकर उनके सेंस ऑफ ह्यूमर की तारीफ किए बिना नहीं रहा जा सकता. अब लोग कह रहे हैं कि महेश बाबू को शाहरुख खान से सीखने की ज़रूरत है. उन्हें सीखना चाहिए कि सवालों का जवाब किस अंदाज़ में दिया जाए कि सामने वाले को बुरा भी ना लगे और आप अपनी बात भी इज़्जत से कह जाएं. वो हिंदी में कहावत है ना, ‘सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे’. ठीक वैसे ही.


Posted

in

by

Tags: