12 साल में हो गई थी शोले की मौसी की शादी, पहली फिल्म के लिए मिले थे 500 रुपये

लीला मिश्रा ने 1975 में रिलीज हुई फिल्म शोले में बसंती की मौसी का रोल निभाया था. रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने उन्हें देशभर में मशहूर कर दिया था. शोले की कहानी, कलाकार, डायलॉग और गाने सब कुछ अमर हो गए थे, और उन्हीं के साथ अमर हो गया था लीला का निभाया किरदार मौसी. लीला के बोलने का तरीका, उनका चिंता जताना और जय के साथ उनकी बातचीत सबकुछ दर्शकों पसंद आया था.

बॉलीवुड में यूं तो कई एक्टर्स हर साल आते हैं, लेकिन कम ही होते हैं जो इंडस्ट्री में अपने कदम जमा पाते हैं. पुराने जमाने में भले ही बॉलीवुड में काम मिलना लोगों के लिए कुछ हद तक आसान था, लेकिन इंडस्ट्री में जमे रहना और अपने अभिनय से दर्शकों के बीच जगह बना पाना तब भी उतना ही मुश्किल था जितना आज है. लेकिन फिर भी ऐसे कई कलाकार आए जिन्होंने ना सिर्फ बढ़िया काम किया बल्कि अपने किरदारों और अभिनय के चलते अमर हो गए. उन्हीं में से एक अदाकारा रहीं लीला मिश्रा.

मौसी के रोल में अमर हो गईं लीला

लीला मिश्रा ने 1975 में रिलीज हुई फिल्म शोले में बसंती की मौसी का रोल निभाया था. रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने उन्हें देशभर में मशहूर कर दिया था. शोले की कहानी, कलाकार, डायलॉग और गाने सब कुछ अमर हो गए थे, और उन्हीं के साथ अमर हो गया था लीला का निभाया किरदार मौसी. लीला के बोलने का तरीका, उनका चिंता जताना और जय के साथ उनकी बातचीत सबकुछ दर्शकों पसंद आया था.

हालांकि फिल्म में उनका सबसे यादगार सीन वो रहा, जिसमें वीरू यानी धर्मेंद्र टंकी पर चढ़कर मौसी जी को मर जाने की धमकी देता है. 17 जनवरी को लीला मिश्रा की डेथ एनिवर्सरी होती है. लीला मिश्रा ने अपने करियर में 200 से ज्यादा फिल्में की थीं और कई यादगार किरदार निभाए थे. उनके करियर की शुरुआत 40 के दशक में हुई थी. उन्हें मां शिंदे नाम के एक व्यक्ति ने खोजा था, जो दादासाहेब फाल्के से जुड़े थे.

पति से ज्यादा पैसे कमाने का मिला था ऑफर

लीला ने 12 साल की उम्र में राम प्रसाद मिश्रा से शादी की थी. 17 साल की उम्र तक वह दो बेटियों की मां बन गई थीं. लीला के पति को एक्टिंग का शौक था और वह नाटकों में काम किया करते थे. उस जमाने में राम प्रसाद एक्टिंग आजमाने आए थे.

उनके पीछे-पीछे लीला भी चली आईं. लीला को फिल्म में लेने के लिए मामा शिंदे ने लीला के पति राम प्रसाद मिश्रा से उनकी एक्टिंग के बारे में बात की थी और उन्हें फिल्म ऑफर की थी. उस समय एक्ट्रेसेज की कमी हुआ करती थीं और इसलिए महिलाओं को ज्यादा पैसे ऑफर किए जाते थे.

लीला के पति भी एक्टर थे, जहां उन्हें 150 रुपये महीना पर काम दिया गया था वहीं लीला मिश्रा को 500 रुपये महीना ऑफर किए गए थे. हालांकि कैमरा के सामने एक्टिंग ना कर पाने की वजह से लीला के हाथ से यह फिल्म निकल गई थी.

पराए मर्दों को छूने से कर दिया था इनकार

शुरुआत के दिनों में लीला मिश्रा ने गैर मर्दों को फिल्म के सीन्स के लिए छूने से साफ मना कर दिया था. इसके चलते भी उन्हें बहुत से फिल्मी ऑफर्स गंवाने पड़े थे. फिल्म होनहार में भी लीला को एक्टर शाहू मोदक को गले लगाने के लिए कहा गया था, जिसके लिए उन्होंने मना कर दिया था. क्योंकि प्रोडक्शन कंपनी के हाल बुरे थे इसलिए वह लीला को हटा नहीं पाए और उन्हें शाहू की मां का रोल ऑफर किया. यह उनके लिए अच्छा सहित हुआ क्योंकि यहीं से लीला के करियर की शुरुआत हुई.

73 साल की उम्र में मिला अवॉर्ड

लीला मिश्रा ने अपने पांच दशक तक चले करियर में कई बढ़िया फिल्में जैसे अनमोल घड़ी, आवारा, प्यासा, लाजवंती, शोले, पहेली, चश्मे बद्दूर, प्रेम रोग में काम किया था. उन्हें मां, चाची और मौसी के रोल्स मिलते थे, जिनमें उनके काम को खूब पसंद भी किया जाता था.

उनकी फिल्म नानी मां में भी उनके काम को खूब पसंद किया गया था. यही वो फिल्म थी जिसके लिए लीला को 73 साल की उम्र में अपना पहला बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला था. बॉलीवुड के अलावा लीला मिश्रा ने भोजपुरी सिनेमा में भी काम किया था. लीला का निधन 17 जनवरी 1988 को हार्ट अटैक की वजह से हुआ था.


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