श्री जटाशंकर धाम में तीन सींग और तीन नेत्र वाले नंदी बाबा का निधन

श्री जटाशंकर धाम के प्रसिद्ध 3 सींग वाले नंदी बाबा ने गुरुवार की शाम देह त्याग दिया. नंदी बाबा के तीन सींग थे और ललाट पर तीसरी आंख भी थी. 6 साल की उम्र में नंदी बाबा श्री जटाशंकर धाम आए थे. शुक्रवार को पूरे विधि-विधान से उनका समाधि संस्कार किया गया.

बुंदेलखंड के केदारनाथ कहे जाने वाले श्री जटाशंकर धाम में पिछले 11 साल से रह रहे तीन सींग और तीन नेत्र वाले नंदी बाबा (बैल) आस्था का केंद्र बने हुए थे जिनका हाल ही में बीमारी के चलते निधन हो गया है. जानकारी के मुताबिक,

नंदी बाबा काफी दिनों से बीमार चल रहे थे और जटाशंकर ट्रस्ट कमेटी में उनका इलाज भी किया जा रहा था. नंदी बाबा के निधन के बाद से ही संपूर्ण जटाशंकर धाम में शोक की लहर दौड़ पड़ी है. उनके निधन के बाद धाम को बंद रखा गया, इसके साथ ही उनका समाधि संस्कार पूरे विधि विधान के साथ पूरा किया गया.

जानकारी के मुताबिक, नंदी बाबा का जन्मस्थल किशनगढ़ है जो लक्ष्मण यादव के घर जन्मे थे. नंदी जब विचरण करते हुए श्री जटाशंकर धाम पहुंचे तब उनकी आयु करीब 6 वर्ष की थी. उनके तीन सींग साथ ही ललाट पर तीसरा नेत्र भी दिखाई दे रहा था जो जटाशंकर धाम में आकर्षण और विशेष आस्था के केंद्र बने हुए थे.

मंदिर परिसर में जहां नंदी बाबा का निवास था, उसी स्थान पर लगभग 6 फीट गहरा गड्ढा खोदकर उन्हें दफनाया गया. इसी के साथ ही मंदिर परिसर ने उनकी लगभग 2 लाख रुपए की प्रतिमा स्थापित करने का फैसला किया है.

इसके अलावा यहां पर एक नंदी मंदिर भी बनवाया जाएगा. यह प्रदेश और देश  का पहला नंदी मंदिर होगा. अंतिम विदाई के बाद से ही नंदी बाबा की हूबहू प्रतिमा बनाने का काम शुरू कर दिया गया है. बताया जा रहा है कि इस प्रतिमा को हाईटेक रूप दिया जाएगा.

 

नंदी बाबा ने गुरुवार की शाम देह त्यागा था जिसके बाद शुक्रवार को समाधि की क्रिया की गई और मंत्रोच्चार के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई. नंदी बाबा के देह त्यागने की खबर का पता चलने पर भारी संख्या में भक्त यहां पहुंचे और नंदी बाबा को अंतिम विदाई दी.

नंदी बाबा 6 साल की उम्र में श्री जटाशंकर धाम में आए थे और तब से यहीं रह रहे थे. जो भी भक्त श्री जटाशंकर धाम के दर्शन के लिए आता था नंदी बाबा के दर्शन भी जरूर करता था. नंदी बाबा के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हुए बाजारों को भी बंद रखा गया. नंदी बाबा कुछ समय से बीमार चल रहे थे, 5 सदस्यीय डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रहगी थी लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका.


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