3 बेटियों के बाद बेटा चाहते थे, अब एक साथ जन्मीं तीन और बेटियां, पिता बोले- भगवान का आशीर्वाद, इनको शान से पालूंगा

माता-पिता बनना किसी भी कपल के लिए बहुत सौभाग्य की बात होती है। कई जोड़ी आपसी सहमति से शादी के कुछ सालों बाद ही माता-पिता बन जाते हैं। वहीं कई बार चाहकर भी कुछ समस्याओं की वजह से कपल माता-पिता नहीं बन पाते हैं और फिर बच्चे की आस में वह

निराश रहते हैं। वैसे देखा जाए तो आज भी ऐसे बहुत से लोग होते हैं, जिनको बेटों की चाह सबसे ज्यादा होती है। लेकिन आजकल के जमाने में बेटा और बेटी में कोई भी फर्क नहीं है। भले ही बेटा-बेटी के समान होने की बात चाहे कितनी भी की जाए लेकिन आज भी कुछ लोगों की मानसिकता में कोई भी बदलाव नहीं आया है।

समाज में आज भी एक ऐसा बड़ा हिस्सा है, जो बेटियों से ज्यादा श्रेष्ठ बेटों को मानता है। कुछ लोग तो ऐसा भी मानते हैं कि बेटी होना किसी अभिशाप से कम नहीं है और बेटे की चाह के लिए वह कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। परंतु सभी लोग ऐसे नहीं हैं। इसी बीच मध्यप्रदेश के

राजगढ़ में कुछ ऐसा ही मामला देखने को मिला है। यहां तीन बेटियों के बाद माता-पिता को बेटे की चाहत थी, लेकिन उनके यहां एक साथ तीन और बेटियों ने जन्म लिया है। एक साथ इस दुनिया में आईं तीनों बेटियों का नाम गंगा, जमुना और सरस्वती रखा गया है।

3 बेटियों के बाद बेटा चाहते थे, 3 बेटी और जन्मीं

आपको बता दें कि नरसिंहगढ़ के मान पिछोड़ी गांव में सीमा तिवारी की साल 2013 में राकेश तिवारी से शादी हुई थी। शादी के बाद साल 2020 तक उनके यहां तीन बेटियों का जन्म हुआ। राकेश और सीमा अब चाहते थे कि उनका बेटा हो। गुरुवार की शाम को सीमा को प्रसव

पीड़ा हुई, तो परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां देर शाम महिला ने तीन बेटियों को जन्म दिया। पहली बच्ची का वजन 2.4 किग्रा, दूसरी वाली बच्ची का वजन 2 किग्रा और तीसरे बच्ची का वजन 2.2 किलोग्राम है। डॉक्टर्स का ऐसा कहना है कि जच्चा और तीनों बच्चे शिशु शिशु हैं।

पिता ने कहा- भगवान का आशीर्वाद हैं बेटियां

वहीं राकेश तिवारी का ऐसा कहना है कि हमें एक बेटे की चाहत थी, इससे हमारा परिवार पूरा हो जाता। लेकिन हमारी तीन बेटियां हुई हैं। यह भी भगवान का आशीर्वाद है। हम बहुत खुश हैं। मैं इन्हें बड़े शान से पालूंगा और सभी को खुश रखूंगा।

सीमा के द्वारा ऐसा बताया गया कि इनका नाम भी हमने सोच लिया है। हमारी पहले 3 बेटियां थीं। बड़ी वाली बेटी का नाम मनीषा (7), मझली बेटी का नाम दीपिका (5) है। छोटी बेटा का नाम साक्षी (2) है। बात दें भले ही माता-पिता को बेटे की चाहत थी परंतु यह तीन बेटियों के जन्म के बाद भी बहुत खुश हैं।

बालाघाट में चार बच्चों को हो चुका है एकसाथ जन्म

आपको बता दें कि इससे पहले भी कुछ ऐसा ही मामला कुछ दिनों पहले आया था। दरअसल, बालाघाट जिला अस्पताल में किरनापुर तहसील के ग्राम जराही की 26 वर्षीय प्रीति नंदलाल मेश्राम ने एक साथ 4 बच्चों को जन्म दिया था, जिसमें 3 लड़के और एक लड़की थी। हालांकि, यह बच्चे कमजोर हुए थे। 53 दिन अस्पताल में इन्हें रखा गया था। स्वस्थ होने पर घर भेज दिया गया। परिवार का ऐसा कहना था कि हमें चार गुना खुशियां मिली हैं।

 


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