सब्ज़ी बेचने वाली की लड़की को नामी स्कूलों ने दाखिला नहीं दिया, अब वही बेटी बड़ी कंपनी में हेड बनी

कहते है, कि जीवन में सफलता हासिल करनी है तो मुश्‍किलों को अपने गले का आभूषण बना लो। क्‍योंकि सफलता के रास्‍ते पर पग पग पर कठिन हालातों की सीढ़ी चढ़नी पड़ती है। उसके बाद ही मिलती है। कहते है अगर समस्‍याओं से जंग जीतना मनुष्‍य को आ गया। तो कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

आज हम एक ऐसी लड़की के विषय में आपको बताने जा रहे है, जिसने मुश्‍किलों को अपने जीवन का सबसे बड़ा सत्‍य माना और उससे लड़ते-लड़ते ही जीवन में सफलता प्राप्‍त कर ली। वह लड़की जिसके जुनून ने उसे अपने परिवार की पहली शिक्षित सदस्‍य बना दिया। उस लड़की ने शिक्षा के लिए हर कदम पर कई बाधाओं का सामना किया।

आज की हमारी कहानी जिस लड़की की है, उसका नाम मधु प्रिया है। मधु प्रिया (Madhu Priya) वह लड़की जिसने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया कि किसी भी व्‍यक्‍ति को सफलता उसके पास मौजूद संसाधनों को देखकर नहीं मिलती। कठिन परिश्रम ही सफलता की चाबी है।

मधु प्रिया परिवार की पहली लड़की जिसने मास्‍टर डिग्री हासिल की

मधु एक मध्‍यमवर्गीय परिवार से संबंध रखती है। मधु के माता पिता सब्‍जी बेचने (Vegetable Selling) का कार्य करते है। वह बताती है कि वह अपने परिवार की पहली ऐसी लड़की है जिसने शिक्षा हासिल की है।

मधु ने बताया कि उन्‍होंने मास्‍टर की डिग्री हासिल की है और यह डिग्री उनके परिवार में किसी लड़की के द्वारा पहली बार हासिल की गई है। इसके अलावा उनके परिवार में मधु वह लड़की है, जिसने कैंपस सेलेक्‍शन करके बहुराष्‍ट्रीय कंपनी (International Company) में अपनी जगह बनाई है। वह उनके परिवार में जॉब करने वाली पहली लड़की है।

मॉं कि मेहनत का है परिणाम

मधु के लिए यह सफलता बहुत मायने रखती है, क्‍योंकि जिन हालातों का सामना करने उन्होंने यह हासिल किया है वह बहुत ही कठिन थे। मधु अपनी सफलता को अपनी माता के चरणो में समर्पित करती है।

वह कहती है कि उनकी मॉ कि वजह से ही वह यह कर पाई है, उनके सपोर्ट और मेहनत के बिना वह यह डिग्री कभी हासिल नहीं कर पाती। मधु माता देवकी और थिरूवेंगदम् के घर में जन्‍मी थी। मधु की एक और बहन है जोकि उनसे बड़ी है मधु दूसरे नंबर की बेटी है।

मधु का प्रारंभिक जीवन सफर

मधु बताती है कि उनका परिवार चैन्‍नई (Chennai) में एक छोटे से कमरें में रहता था। वह कमरा एक रसोई घर के समान था। वह बताती है कि उनके पिताजी और मॉं 4 बजे सुबह उठकर सब्‍जी बेचने का कार्य करते थे। रात में भी उनके माता पिता सब्‍जी बेचकर लेट घर आते थे।

मधु के माता पिता सब्‍जी बेचकर ही अपने घर को चलाते थे। चूँकि मधु के परिवार में पहले से ही पैसों की तंगी थी। इसी वजह से उनके माता पिता भी पढ़ाई नही कर पाये। घर के कठिन हालात होने के बावजूद भी मधु के माता पिता ने अपने बच्‍चों कि शिक्षा में किसी तरह की बाधा नहीं आने दी।

भले ही उन्‍होंने पैसों की तंगी की वजह से अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़ दिया हो। लेकिन वह यह कभी नहीं चाहते थे, कि उनकी बच्चियों के साथ ऐसा हो। इसलिए उन्‍होने अपनी बच्‍ची को महंगे स्‍कूल में दाखिला दिलवाया। वह स्‍कूल जहॉं बहुत ही अमीर घर के बच्‍चें पढ़ा करते थे।

महंगे स्‍कूल में मॉं ने करवाया एडमिशन

उस स्‍कूल में मधु की माता जी ने उनका दाखिला करवाया। हालांकि मधु के माता पिता की आर्थिक हालात को देखते हुए स्‍कूल (School) वाले एडमिशन देने मे आना कानी कर रहे थे। मधु की माता को कई बार स्‍कूल से वापस घर भी भेज दिया जाता था। लेकिन मधु की माँ ने हार नहीं मानी वह रोज स्‍कूल गई। तब तक जब तक उनकी बच्‍ची का एडमिशन नहीं हो गया।

कई पापड़ बेलने पड़े, पर अंत में मधु को महंगे स्‍कूल में एडमिशन मिल गया। मॉं के परिश्रम की वजह से ही मधु को उस स्‍कूल में एडमिशन मिला। मॉं कि जिद स्‍कूल को झुकाने में कामयाब रही। आपको बता दे कि मधु की मॉं ने अपनी बच्‍ची का एडमिशन जिस स्‍कूल में करवाया उस स्‍कूल में एक्‍टर, पॉलीटिशियन, और खिलाडियों के बच्‍चें पढा करते है।

माता पिता ने सब्‍जी बेचकर भरी स्‍कूल फीस

मधु बताती है कि उनके परिवार ने दिन रात मेहनत करके उस स्‍कूल की फीस भरी। लेकिन उन्‍हें उस महंगे स्‍कूल में पढ़ाया। मधु बताती है कि उनके माता पिता स्‍कूल मीटिंग में कभी कभी समय पर नही आया करते थे। क्‍योंकि वह यह नहीं चाहते थे, कि एक सब्‍जी वाले की बेटी होने की वजह से उनकी बच्‍ची को अपने क्‍लासमेट्स के सामने शर्मिंदा होना पड़े।

मधु कहती है कि ऐसा कभी नहीं था कि उन्‍हें अपने माता पिता की वजह से शर्मिंदा होना पड़े। वह कहती है कि मेरे माता पिता ने जिस तरह से मुझे आगे बढ़ाया है। वह मेरे लिये बहुत ही गर्व की बात है। इस बात से में बहुत ही सम्‍मानित महसूस करती हूँ। मेने कभी उनकी वजह से शर्मिंदगी महसूस नहीं की।

आज एचआर प्रोफेशनल के पद पर है कार्यरत

आपको बता दे कि मधु के माता पिता दोनों दिन रात मेहनत करके 800 रूपये दिन का कमा लेते थे। इसी से वह अपनी बच्‍ची की स्‍कूल फीस भी जमा करते थे और घर का खर्चा भी चलाते थे। मधु बताती है कि जब वह कंपनी के इंटरव्‍यू दे रही थी। उस समय उन्‍हें कभी अपने परिवार की वजह से भेदभाव का शिकार नहीं होना पड़ा।

वह बताती है हर कोई उनके बैकग्राउण्‍ड के बारे में बहुत अच्‍छे से जानता था। आज मधु अपनी मेहनत ओर माता पिता के बलिदान की वजह से एचआर प्रोफेशनल (HR Professional) के पद पर कार्यरत है। अपनी बच्‍ची को इस मुकाम में देखकर मधु के माता पिता अपने ऑंसुओ को बहने से नहीं रोक पाते है


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