एक पैर से कूद-कूदकर 1KM स्कूल जाती है बच्ची, कहती है-पढ़ती हूं..ताकि गरीब बच्चों को पढ़ा सकूं

New Delhi: जीतूंगी मैं, यह खुद से वादा किया। जितना सोचा उससे कोशिश ज्यादा किया। तकदीर भी रूठी पर हिम्मत नहीं टूटी। मजबूत इतना अपना इरादा किया। बिहार के जमुई की इस बच्ची पर यह लाइन बिल्कुल फिट बैठता है। इस बच्ची का हौसला इतना मजबूत है कि मुसीबतों ने भी हार मान ली है। टीचर बनने का सपना बुने ये बच्ची एक पैर से एक किलोमीटर का रास्ता तय करती है- ताकि स्कूल जाकर पढ़ाई कर सके, और गरीब बच्चो को पढ़ा सके।

बच्ची की उम्र महज 10 साल है। नाम सीमा है। वह फतेहपुर गांव में रहती है, जो नक्सल प्रभावित इलाका है। एक हादसे ने सीमा से उसके पैर छीन लिए, लेकिन हौसला नहीं छीन पाया। इस हादसे में उसका एक पैर काटना पड़ा था। सीमा अपने गांव में शिक्षा की एक नई मिसाल कायम कर रही है। वह मुसीबत के बाद भी स्कूल पढ़ने जाती है। गांव की लड़कियों को भी शिक्षा के लिए प्रेरित करती है।

वह मजदूर पिता की बेटी है, जो जज्बे और जुनून से भरी हुई है। पिता मजबूरी करके परिवार चलाते हैं। मां ने बताया कि- बेटी को पढ़ने का बहुत शौक है। बाकी बच्चे स्कूल न जाने के लिए रोते थे, लेकिन बिटिया ने स्कूल जाने की इच्छा खुद से जताई। वह दूसरे बच्चे को देखते और स्कूल जाने का ख्वाब लिए टीचर बनने का सपना देखती।

स्कूल में सीमा का एडमिशन तो हो गया, लेकिन परेशानी थी तो उसके स्कूल जाने की। स्कूल 1 किलोमीटर दूर था। 1 किलोमीटर पगडंडी रास्ते पर वह एक पैर से कूद-कूदकर स्कूल जाती। कहती है कि एक पैर कट जाने से मुझे कोई गम नहीं है,

मैं अपने एक पैर से सारे काम कर लेती हूं। सीमा को एक पैर से स्कूल जाते हुए जिस किसी ने भी देखा उसने दांतों तले ऊंगली दबा ली। लोगों ने कहा कि- दिव्यांग होने के बाद सीमा आत्मविश्वास से भरी है। उसके स्कूल के टीचर का कहना है कि हमसे जितना मदद हो पाएगा हम सीमा के लिए करेंगे। बच्ची का हौंसला देखकर आप भी उसे सलाम करेंगे।


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