बिहार के राकेश जिन्हें यूक्रेन की अक्साना से हुआ प्यार, शादी की और फिर वहीं बस गए

मूल रूप से बिहार के सहरसा जिले के रहने वाले राकेश, पत्नी और दो बच्चों के साथ यूक्रेन में रहते हैं. फ्लाइट के टिकट की काफी अधिक कीमत होने की वजह से वे अपने खर्च पर भारत नहीं आ पा रहे हैं.

रूस और यूक्रेन में जंग शुरू हुए कई दिन हो गए हैं. यूक्रेन के कई शहरों में अभी भी भीषण लड़ाई जारी है. इस बीच युद्धग्रस्त देश में फंसे भारतीय राकेश शंकर भारती ने aajtak.in के साथ बातचीत में बताया है कि क्यों यूक्रेन से भारत लौटना उनके लिए फिलहाल संभव नहीं है.

राकेश ने बताया कि वे पत्नी और दो बच्चों के साथ वहां रहते हैं. वहां उनकी जिंदगी काफी अच्छी चल रही थी. अब अचानक युद्ध शुरू हो गया. ऐसे में सबकुछ छोड़कर वहां से भारत आना आसान नहीं है. ऊपर से फ्लाइट के टिकट के दाम इतने अधिक हैं कि वे खुद ये कीमत चुकाकर भारत नहीं आ सकते.

उन्होंने कहा है कि भारत सरकार को रूस के साथ बातचीत कर शांति स्थापित करने की कोशिश करनी चाहिए. राकेश मूल रूप से बिहार के सहरसा जिले के रहने वाले हैं. वो साल 2015 में रूसी भाषा सीखने के लिए यूक्रेन गए थे.

इसी दौरान राकेश की मुलाकात यूक्रेन में रहने वाली अक्साना से हुई. जल्द ही दोनों के बीच हुई दोस्ती प्यार में बदल गई. बाद में राकेश और अक्साना ने कोर्ट मैरिज कर ली और अब उनके दो बच्चे हैं.

राकेश रूसी, जापानी, फ्रेंच समेत कई और भाषाओं के जानकार हैं. राकेश यूक्रेन में अनुवादक का काम करते हैं. उन्होंने कई किताबें भी लिखी हैं. लेकिन रूस से युद्ध के बीच जहां लाखों लोग देश छोड़कर जा रहे हैं, वहीं राकेश यूक्रेन नहीं छोड़ पा रहे.

बिहार जाना चाहते हैं लेकिन..

राकेश शंकर का कहना है कि यूक्रेन में हालात बहुत खराब हैं. पोलैंड के बॉर्डर पर लाखों लोग खड़े हैं, ऐसे में पत्नी-बच्चों समेत निकलना खतरे से खाली नहीं है. फ़्लाइट्स की टिकट इतनी महंगी है कि उसका ख़र्च उठा पाना मुश्किल है. काम बंद होने के कारण घर खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है.

राकेश कहते हैं कि हालात बेहतर होने पर वो अपने पत्नी-बच्चों संग बिहार जाना चाहते हैं. वो बच्चों को बिहार दिखाना चाहते हैं, जहां उनका बचपन बीता था. राकेश इस जंग में अपने कई दोस्तों को खो चुके हैं. खुद उनके ससुर खार्कीव में फंसे हुए हैं. जिस गांव में वो हैं, वहां रूसी सेना कब्जा कर चुकी है.

बकौल राकेश शंकर ये लड़ाई लंबी चलेगी. पैसों की दिक्कत और बढ़ सकती है. हम लोग बैंक से पैसे भी निकाल नहीं पा रहे हैं. भूखे ना रहना पड़े, इतना ही सामान इकट्ठा कर रहे हैं. यहां हर घंटे पर सायरन बजता है. सायरन बजते ही बच्चों को बचाते हुए बंकर में छुप जाते हैं.

राकेश रिसर्चर स्कॉलर रहे हैं. उन्होंने दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से पढ़ाई की है. वो यूक्रेन के डनिप्रो में रह रहे हैं. हालांकि, रूसी हमले से बचने के लिए उन्होंने बंकर में शरण ले रखी है.


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