8 साल की उम्र में हो गई थी शादी, लेकिन पति ने ऑटो चलाकर पत्नी को पढ़ाया और बना दी डॉक्टर

कोई भी मनुष्य चाहे वो जिन्दगी के किसी भी मोड़ पर हो उसकी किस्मत में जो लिखा है जितना लिखा उसे हर हाल में मिलता है. इसी लिए तो कहते है की किस्मत का लिखा मिटा नहीं सकता. इस संसार में कब किस इंसान का भाग्य उसको चमक जाए इस बारे में कुछ भी नही कहा जा सकता है. क्योकि यदि भाग्य मे कुछ अच्छा होता है तो वह मिलकर ही रहता है. और हां इसमें इन्सान की मेहनत भी रंग लाती है.

यदि व्यक्ति कठिन मेहनत और परिश्रम करने पर डटा रहे तो वो अपने लक्ष्य को जरुर हासिल कर लेता है. अब ऐसा ही एक अनोखा मामला सामने आया राजस्थान के चौमू से जहां एक लड़की को पढ़ाई करना काफी कठिन था

लेकिन उसने इस पूरा करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की और आज सफलता उसके कदम चूम रही है तो चलिए हम आपको रूबरू कराते हैं राजस्थान की होनहार रूपा यादव के से जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से अपनी मंजिल को हासिल करके ही दम लिया है.

जब रूपा यादव से उसके जीवन के स्ट्रगल के बारे में पूछा गया तब उसने बताया की जब मैं तीसरी कक्षा में थी तब मेरी शादी करवा दी गई थी. तब मेरी आयु कुल 8 वर्ष की थी. तब मेरा स्कूल जान काफ़ी कठिन हुआ करता था. मैं पैदल स्कूल के लिए बस अड्डे तक जाती थी फिर बस पकड़ कर वहां से स्कूल के लिए जाना पड़ता था.

रूपा का कहना है की मैं तो बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थी और मेरा सपना था की मैं डॉक्टर बनी और यह सपना जब मेरे अंदर उजागर हुए जब मेरे चाचा भीमा राम जी को हार्ट अटैक आया था. और उनको समय पर उपचार नहीं मिल सका इस कारण से मैंने यह मन में सपना पाला लिया था कि मैं डॉक्टर बनूंगी एक दिन तभी से रूपा ने मन में सोच लिया था वह बायोलॉजी पड़ेगी और डॉक्टर बनेंगी.

वास्तव में रूपा ने कई कठिनाइयों का सामना करते हुए अपनी शिक्षा पूरी की और वर्ष 2016 में NEET की परीक्षा पास की लेकिन रूपा की इतनी अच्छी रैंक नहीं बन सकी इस कारण उनको महाराष्ट्र स्टेट मिला लेकिन ना घरवालों ससुराल वालों ने मना कर दिया लेकिन इतनी दूर जाकर पढ़ाई करने के लिए उन्होंने हिम्मत नहीं हारी है और वर्ष 2017 में फिर से नीट की परीक्षा दी और उसमें वह उत्तीर्ण हुई. रूपा ने इस बार आलइंडिया मे रेंक 2283 हासिल की.

रूपा की डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए रूपा के पति ने भी इनका साथ दिया और उनकी इस इच्छा को पूरा करने के लिए उनके पति ने ऑटो रिक्शा चलाते हुए उनकी पढ़ाई का खर्च उठाया. तभी रूपा ने अपनी जीजी और जीजा के सामने भी अपनी बात रखी और उन्होंने भी उनकी पैसों

से थोड़ी मदद की. रूपा अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए पूरे मन से लगन से कठिन मेहनत कर कर लग गई. अपनी पढ़ाई करने और अपना सपना पूरा करने के लिए. रूपा की पढ़ाई के लिए इतनी लगन और चाहत देखकर उनके पति ने भी पढ़ाई करने का मन बनाया और वह अब एम ए प्रथम वर्ष के छात्र है.


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